अमानक वर्ण

अमानक वर्ण  Hindi grammar questions for competitive exam part-5




1  शुद्ध वर्तनी    2 . अमानक वर्ण 

 (i)  -शुद्ध वर्तनी ➨ बर्तन की शुद्ध " वर्तनी " क्या है ?
बर्तन का शुद्ध वर्तनी ➨ "बर्तन " का शुद्ध वर्तनी   "बरतन "है ∣

  (ii) . अमानक वर्ण - हिंदी में बहुत से ऐसे वर्ण हुआ करते थे ,जो की वर्तमान समय में चलन में नहीं है ,अथवा हिंदी के मूल वर्णो में शामिल नहीं है।  इस प्रकार के  सभी वर्ण " अमानक वर्णो " की श्रेणी में  आते हैं Ι
 अर्थात वे   " वर्ण " जो पूर्व में तो मान्य रहे हो ,परन्तु वर्तमान वर्णमाला के दृस्टीकोण   से मान्य न  होते हो , अमानक वर्ण है ।
अमानक वर्ण क्या है ➨ ऐसे वर्ण जिनका कोई " मानक " न हो , तथा जो सर्वमान्य न हो " अमानक " वर्ण है , अथवा ऐसे वर्ण जिनका पहले तो मानक रहा हो परन्तु वर्तमान समय में उनका कोई " मानक " न  हो अमानक वर्ण कहलाते है ।

अमानक वर्ण किसे  कहते है ➨ जब कोई वर्ण वर्तमान परिपेक्ष्य  के मानकों  पर खरा नहीं उतरता अथवा वर्तमान में स्वीकार वर्णमाला में शामिल न  हो , अथवा पूर्व में स्वी…

वृद्धि और विकास के सिद्धांत

वृद्धि और विकास का सिद्धांत

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वृद्धि और विकास का सिद्धांत
वृद्धि और विकास का सिद्धांत


नमस्कार दोस्तों , इस आर्टिकल में हमने " वृद्धि और विकास के सिद्धांत  " के प्रश्नों का एक - एक करके संकलन किया है। साथ ही इस पीडीऍफ़ में हमने " बाल विकास और शिक्षा शास्त्र " के सभी topics को विषयवार cover किया है। इस नोट्स की विशेषता यह है , कि - इसमें आपको पढ़ने , समझने और याद करने में आसानी होगी। कियोकि इन नोट्स को आपके बालविकास एवं  शिक्षा - शास्त्र को समझने और याद करने की समस्याओं को ध्यान में रखकर बनाया गया है।

short notes Part-6 

अभिवृद्धि और विकास के सिद्धांत

वृद्धि और विकास के सिद्धांत के अंतरगर्त निम्नलिखित सिद्धांत आते है ,जो इस प्रकार है। 
  •  निरंतरता का सिद्धांत। 
  •  तीव्र गति का सिद्धांत। 
  •  सामन्य से विशेष की ओर। 
  •  वैयक्तिक भिन्नताओं का सिद्धांत। 
  •  वंशानुक्रम और वातावरण का सिद्धांत। 
  •  परिपक्वता का सिद्धांत। 
  • एकीकरण का सिद्धांत। 
  •  विकास की दिशा। 
  • भविष्यवाणी का सिद्धांत। 

 वृद्धि और विकास का क्या अर्थ है  अथवा वृद्धि और विकास का क्या अर्थ है 

1 - वृद्धि -  वृद्धि का अर्थ , कि शरीर के किसी अंग की वृद्धि होना , जो कि हमे प्रत्यक्ष रूप से दिखाई दे सकती है। जैसे कि - लम्बाई का बढ़ना। अर्थात वृद्धि मात्रात्मक होती है।  इसके अलावा वृद्धि की कुछ विशेषताएं इस प्रकार है। 
  •  वृद्धि को प्रत्यक्ष रूप से देखा जा  सकता है। 
  •  वृद्धि मात्रात्मक होती है। 
  • वृद्धि सदैव समान गति से नहीं होती है। 
  •  वृद्धि जीवनभर नहीं चलती है। 
  • वृद्धि का एक समयकाल होता है। 
  • शारीरिक वृद्धि और मानसिक वृद्धि एक दूसरे को प्रभावित करती है। 


2 - विकास - विकास का दायरा बड़ा होता है , जिसमे वृद्धि शामिल होती है। अर्थात वृद्धि होना भी विकास के अंतरगर्त ही आता है।
इसके अलावा विकास  की कुछ विशेषताएं इस प्रकार है।  


  • विकास प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष दोनों प्रकार होता है।
  •  विकास  दिखाई भी देता है और नहीं भी देता है। 
  • विकास जीवनभर चलने वाली प्रक्रिया है। 
  • विकास कभी न रुकने वाली प्रक्रिया है। 
  • विकास के अंतरगर्त शारीरिक विकास और मानसिक विकास दोनों आते है। 

वृद्धि और विकास के बीच अंतर क्या है



वृद्धि और विकास में अंतर  -  वृद्धि और विकास में निम्नलिखित अंतर है , जो इस प्रकार है ।

वृद्धि और विकास में अंतर

विकास -   विकास आजीवन चलने वाली प्रक्रिया है।    विकास का क्षेत्र बहुत ही विस्तृत है।  जिसमे हमारे सपूर्ण विकास के क्षेत्र को शामिल किया जाता है।  जिसमे हमारा - शारीरिक विकास और मानसिक विकास दोनों आते है।  विकास अपने आप एक विस्तृत अर्थ को लिए हुए है । विकास के अंतरगर्त - " वृद्धि " एक छोटा सा भाग है । या ये कहे कि - " वृद्धि " ही विकास के अंतरगर्त आती है ।
वृद्धि  -  वृद्धि  हमारे विकास की प्रक्रिया के अंतरगर्त होने वाली एक - छोटा सा भाग है।  जिसमे  केवल  " वृद्घि " को ही शामिल किया जाता है।  वृद्धि का समयकाल एक निश्चित होता है , अर्थात वृद्धि एक निश्चित समय तक ही होती है।  अर्थात - संपूर्ण विकास में होने वाला एक छोटा सा भाग है। 

⇀ विकास के अंतगर्त -  -  कार्य कुशलता , कार्य क्षमता , व्यवहार आदि  विभिन्न प्रकार की क्रियाओ को शामिल किया जाता है। 
जबकि वृद्धि के अंतरगर्त -  बालक के आकार का बढ़ना , लम्बाई का बढ़ना आदि विभिन्न तथ्यों को शामिल किया जाता है। 

⇀ विकास एक ऐसी प्रक्रिया है , जो कि  व्यक्ति के जीवन में " जीवन -पर्यन्त " चलती रहती है। कभी भी रूकती नहीं है , जब तक मनुष्य जीवित रहता है ,तब तक विकास की क्रिया चलती रहती है।  
जबकि " वृद्धि " एक निश्चित समय काल तक ही चलती है ।  अर्थात वृद्धि विकास की तरह कभी भी जीवन भर नहीं चलती है।  वृद्धि की एक निश्चित समय सीमा या समय काल होता है। 

⇀ विकास के अंतगर्त " वृद्धि " की सभी क्रियाओ को शामिल करते है , जबकि  " वृद्धि " होने का अर्थ यह बिलकुल भी नहीं होता है , कि  उसमे " विकास " भी हो रहा है।  कियोकि  वृद्धि का दायरा सीमित है , जबकि विकास का दायरा विस्तृत है। 
मानसिक विकास

10 - मानसिक विकास ⇀ मानसिक विकास एक ऐसा विकास होता है , जो निरंतर चलता रहता है।  अर्थात जैसा की - हम जानते है कि  - हमारे शारीरिक विकास की एक समय सीमा अथवा काल होता है , जिसके बीच में ही शारीरिक विकास होता है , या ये कहे की एक निश्चित समय तक ही हमारा शारीरिक विकास होता है। 
जबकि हमारा मानसिक विकास निरंतर चलता रहता है। 
मानसिक सा मनो शाररिक विकास के अंतरगर्त - विभिन्न तरह के अन्य विकास को भी शामिल किया जाता है। 
जैसे कि  -
 ⇀मानसिक विकास होना। 
⇀  सामाजिक विकास होना। 
⇀  सामाजिक विकास होना। 

11 - इसके अलावा यदि हम भारतीय - मनीषियों की बात करे , तो हम देखते है कि भारतीय मनीषियो ने - " मानव विकास को 7 (सात ) भागो में विभाजित किया है।  जो क़ि इस प्रकार है। 


भारतीय मनीषियो अनुसार 
(i )  गर्भावस्था - इसके अंतरगर्त - " गर्भाधान से जन्म तक " के समय काल को शामिल किया जाता है। 
 (ii ) शैशववस्था   - इसके अंतरगर्त - " जन्म  से 5 वर्ष तक " के समयकाल को शामिल किया जाता है। 


(iii )  बाल्यावस्था - इसके अंतरगर्त - " पांच वर्ष से 12 वर्ष तक " के समयकाल को शामिल किया जाता है। 
(iv ) किशोरावस्था - इसके अंतरगर्त - " 12 वर्ष से 18 वर्ष तक " के समय काल को शामिल किया जाता है। 
(v ) युवा वस्था - इसके अंतरगर्त - " 18  वर्ष से 25 वर्ष तक " के समयकाल को शामिल किया जाता है। 
(vi ) प्रौढ़ावस्था - इसके अंतरगर्त  - " 25 वर्ष से 55 वर्ष तक " के समय काल को शामिल किया जाता है। 
(vii )  वृद्धावस्था - इसके अंतरगर्त - " 55 वर्ष से मृत्यु तक " के समयकाल को शामिल किया जाता है। 

दोस्तों , SHORT - NOTES के इस आर्टिकल में  बाल - विकास एवं शिक्षा शास्त्र के इस टॉपिक जिसका नाम "वृद्धि और विकास के सिद्धांत " है,को  हमने बहुत ही SHORT में समझा है। अतः यदि आप बाल - विकास एवं शिक्षा शास्त्र के SHORT - NOTES  का अगला आर्टिकल  देखना चाहते है ,तो नीचे दी गयी लिंक पर CLICK करें।

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