बाल्यावस्था

बाल्यावस्था 

बाल्यावस्था
बाल्यावस्था 




uptet/mptet/rtet/ctet/htet/pgt/tgt/prt

short notes Part-9   

नमस्कार दोस्तों , इस आर्टिकल में हमने "बाल्यावस्था   " के प्रश्नों का एक - एक करके संकलन किया है। साथ ही इस पीडीऍफ़ में हमने " बाल विकास और शिक्षा शास्त्र " के सभी topics को विषयवार cover किया है। इस नोट्स की विशेषता यह है , कि - इसमें आपको पढ़ने , समझने और याद करने में आसानी होगी। कियोकि इन नोट्स को आपके बालविकास एवं  शिक्षा - शास्त्र को समझने और याद करने की समस्याओं को ध्यान में रखकर बनाया गया है। 
बाल्यावस्था और विकास pdf
बाल्यावस्था और विकास pdf


बाल्यावस्था का परिचय 

बाल्यावस्था  से तात्पर्य बालक की उस  अवस्था से होता है ,जो कि बालक के जीवन में शैशावस्था के बाद आती है। अर्थात सामान्य तौर पर कहे तो बाल्यावस्था का समयकाल - 6 वर्ष से 11 या 12 वर्ष तक " माना जाता है। 

बाल्यावस्था की परिभाषाएं


बाल्यावस्था को विभिन्न मनोवैज्ञानिकों ने अपने  - अपने ढंग से परिभाषित किया है। जिसमे से कुछ कथन इस प्रकार है। 


  •  क्रो एंड क्रो के अनुसार - " बाल्यावस्था में बालक अपने गुरुजनो का सम्मान करता है पर वह उनके द्वारा बताये निर्देश के अनुकरण में कमी कर देता  है। 
  •  फ्राईड के अनुसार - " बाल्यावस्था जीवन निर्माण का काल है। "
  •  किलपैट्रिक के अनुसार - " बाल्यावस्था प्रतिद्वंद्वात्मक अवस्था हैं। "
  •  रॉस के अनुसार - बाल्यावस्था मिथ्या और परिपक्वता का काल है "
  •  कॉल एवं ब्रश के अनुसार - " बाल्यावस्था संवेगात्मक विकास का अनोखा काल है " 

बाल्यावस्था की विशेषताएं



  •   बाल्यावस्था में बालक और बालिकाओं के भार में काफी परिवर्तन पाया  जाता है। जैसे कि - 10 वर्ष तक के बालको का भार समतुल्य  बालिकाओं से कही अधिक होता है। परन्तु इस आयु सीमा के बाद बालिकाओं का भार बालकों से बराबर अथवा उनसे अधिक होना आरम्भ हो जाता है। 
  •  बाल्यावस्था में बालक के हड्डियों की संख्या 270 से बड़कर 350 तक हो जाती है , अर्थात बाल्यावस्था वृद्धि की दृस्टि से अति महत्वपूर्ण अवस्था है। 
  •  परन्तु यदि हम बालक की लम्बाई की बात करे ,तो इस अवस्था में बालक की लम्बाई में एक सामान्य विकास ही देखा जा सकता है।  न क़म न अधिक।  



बाल्यावस्था का अर्थ क्या है

बाल्यावस्था का अर्थ है कि बाल्यावस्था बालक के जीवन में विकास की दृस्टि से एक महत्वपूर्ण अवस्था होती है। इस अवस्था बालक का शारीरिक और मानसिक विकास तीव्र गति से होता है। बहुत से मनोवैज्ञानिकों के अनुसार बालक को जो कुछ भी अपने जीवन में बनना  होता है , वह इस अवस्था में प्रारम्भ होता है। 

" बाल्यावस्था  " का समयकाल  - 6 वर्ष से 11 या 12 वर्ष तक " माना जाता है।  इसका  प्रथम चरण यानी कि
  - 
पूर्व बाल्यावस्था - (  6 वर्ष से 9 वर्ष ) तक का होता है।  इस अवस्था  में बालको की लम्बाई एवं भार दोनों बहुत तेज़ी के साथ बढ़ते  है। साथ ही इस अवस्था में बालको में तर्क करने की क्षमता का विकास होने लगता है।  इस अवस्था में बालको के सीखने की गति - शैशववस्था से तो धीमी रहती है , परन्तु बालको के सीखने का जो क्षेत्र अथवा दायरा होता है , वह शैशववस्था की तुलना में बढ़ जाता है। 

अतः इस अवस्था में - बालको की शिक्षा पर विशेष ध्यान देने की जरूरत होती है।  जिससे कि - बालको की बौद्धिक क्षमता का सही रूप में विकास हो पाए। 

उत्तर बाल्यावस्था


उत्तर बाल्यावस्था का समय काल 9 वर्ष से 11 या 12 वर्ष का माना गया है। अर्थात यह  समय काल पूर्व बाल्यावस्था के बाद आता है।  

  

दोस्तों , SHORT - NOTES के इस आर्टिकल में  बाल - विकास एवं शिक्षा शास्त्र के इस टॉपिक जिसका नाम "बाल्यावस्था  " है,को  हमने बहुत ही SHORT में समझा है। अतः यदि आप बाल - विकास एवं शिक्षा शास्त्र के SHORT - NOTES  का अगला आर्टिकल  देखना चाहते है ,तो नीचे दी गयी लिंक पर CLICK करें।

बाल - विकास-SHORT NOTES - ALL PART (CLICK HERE)



यदि आप " बाल - विकास एवं शिक्षा शास्त्र " के विस्तृत नोट्स चाहते है , तो नीचे दी गयी लिंक पर क्लिक करे। जिसमे " बाल - विकास एवं शिक्षा शास्त्र" सभी टॉपिक को कवर किया गया है। साथ ही इस नोट्स की विशेषता यह है , कि इसमें आपको समझने में और याद करने में किसी भी तरह की समस्या का सामना नहीं करना पड़ेगा। इन नोट्स को बनाया ही इस तरह गया है , कि ये तुरंत समझ में आये और याद हो जाए।







इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

अमानक वर्ण

प्रौढ़ावस्था किसे कहते हैं

विकास की अवस्थाएं