अमानक वर्ण

अमानक वर्ण  Hindi grammar questions for competitive exam part-5




1  शुद्ध वर्तनी    2 . अमानक वर्ण 

 (i)  -शुद्ध वर्तनी ➨ बर्तन की शुद्ध " वर्तनी " क्या है ?
बर्तन का शुद्ध वर्तनी ➨ "बर्तन " का शुद्ध वर्तनी   "बरतन "है ∣

  (ii) . अमानक वर्ण - हिंदी में बहुत से ऐसे वर्ण हुआ करते थे ,जो की वर्तमान समय में चलन में नहीं है ,अथवा हिंदी के मूल वर्णो में शामिल नहीं है।  इस प्रकार के  सभी वर्ण " अमानक वर्णो " की श्रेणी में  आते हैं Ι
 अर्थात वे   " वर्ण " जो पूर्व में तो मान्य रहे हो ,परन्तु वर्तमान वर्णमाला के दृस्टीकोण   से मान्य न  होते हो , अमानक वर्ण है ।
अमानक वर्ण क्या है ➨ ऐसे वर्ण जिनका कोई " मानक " न हो , तथा जो सर्वमान्य न हो " अमानक " वर्ण है , अथवा ऐसे वर्ण जिनका पहले तो मानक रहा हो परन्तु वर्तमान समय में उनका कोई " मानक " न  हो अमानक वर्ण कहलाते है ।

अमानक वर्ण किसे  कहते है ➨ जब कोई वर्ण वर्तमान परिपेक्ष्य  के मानकों  पर खरा नहीं उतरता अथवा वर्तमान में स्वीकार वर्णमाला में शामिल न  हो , अथवा पूर्व में स्वी…

अधिगम का अर्थ एवं परिभाषा

अधिगम का अर्थ एवं परिभाषा 

(Meaning of Learning)

अधिगम का अर्थ एवं परिभाषा
अधिगम का अर्थ एवं परिभाषा 


अधिगम का अर्थ एवं परिभाषा
- सामान्य भाषा में अधिगम का अर्थ होता है - " सीखना " अर्थात जब बालक के द्वारा कुछ नया  सीखा जाता है , तो उसे  हम  बाल -विकास  या शिक्षा शास्त्र की भाषा के अंतरगर्त "अधिगम " कहते है। 


बालक गलतियां करता है और फिर उन गलतियों से सीखता है। फिर पुनः गलती करता है और उनसे सीखता है , और यह क्रम चलता रहता है।अतः इस प्रक्रिया को हम अधिगम या सीखना कहते है। 

उदाहरण के लिए - यदि कोई छोटा बालक चाय को पीने से जल जाता है। तो वो कभी चाय को नहीं पियेगा। 

अधिगम की विशेषताएं  (definition)


  • वुडवर्थ के अनुसार - " नवीन ज्ञान और प्रक्रियाओं को प्राप्त करने की प्रक्रिया ही अधिगम है। "
  • स्किनर के अनुसार - " अधिगम या सीखना व्यवहार में सामंजस्य की प्रक्रिया है। "
  • क्रो एंड क्रो के अनुसार - " आदत , ज्ञान , अभिवृति एवं रुचियां का अर्जन ही अधिगम है। "
  • गिलफोर्ड के अनुसार - " व्यवहार के कारण व्यवहार में होने वाला परिवर्तन ही अधिगम है। "
  • गार्डनर मर्फी के अनुसार - "अधिगम शब्द में वातावरण सम्बन्धी आवश्यकताओं की पूर्ति करने के  लिए व्यवहार सम्बन्धी सभी प्रकार के परिवर्तन को शामिल किया जाता है। "

भाषा अधिगम की परिभाषा 

भाषा अधिगम की परिभाषा 


➤  परिभाषा भाषा का क्षेत्र विस्तृत है। जिसके अंतरगर्त बोलना वाली भाषा ,लिखने की भाषा ,सांकेतिक भाषा आदि सभी प्रकार के भाषा आती है। रोना , बलबलाना ,हाव -भाव , संकेत आदि ।


➤भाषा अधिगम के  रूप  ➨ आकलन ,बोध शक्ति ,शब्द भंडार , वाक्य  निर्माण , शुद्ध उच्चारण आदि ∣
(i)  पृथ्वी पर रहने वाले सभी जीव-जन्तुओ की अपनी अलग - अलग भाषा है І
 (ii) अंग्रेजी , हिन्दी, भी सभी भाषा है І
 (iii) भाषा अर्थहीन भी हो सकती है , जैसे की -संकेत भाव की भाषा І
 (iv) एक गूंगे व्यक्ति की भी भाषा होती है,जिसे वह संकेत भाव से अपने शरीर के अंगो द्वारा प्रकट करता है І
 (v) "बच्चा " जब जनम लेता है ,और जब वह रोता है , तो वह उसकी प्रथम भाषा कही गयी है ।

अधिगम का सिद्धांत


अधिगम का सिद्धांत

अधिगम का सिद्धांत



अधिगम के सिद्धांत का प्रतिपादन थार्नडाइक ने किया था। जिसमे उन्होंने " उद्दीपक और अनुक्रिया"  के सिद्धांत को  प्रतिपादित  किया। 

इसके अलावा अधिगम के कुछ सिद्धांत इस प्रकार है। 


1 - सम्बन्धवाद  सिद्धांत -   इस सिद्धांत का प्रतिपादन " थार्नडाइक " ने किया था।इस सिद्धांत के सम्बन्ध में महत्वपूर्ण तथ्य इस प्रकार है। 


  • इस सिद्धांत के विभिन्न उपनाम है। जो कि इस प्रकार है।उद्दीपन अनुक्रिया सिद्धांत , प्रयत्न एवं भूल का सिद्धांत ,अधिगमबंध का सिद्धांत , S-R थियोरी आदि। 
  •  इस सिद्धांत में थार्नडाइक ने अपना प्रयोग "बिल्ली " पर किया था। 
  •  थार्नडाइक ने इस सिद्धांत का प्रतिपादन 1913 में किया था। 
  •  यह सिद्धांत सीखने पर बल देता है। 
  •  यह सिद्धांत विज्ञान विषय और गणित विषय के लिए अधिक उपयोगी है। 
2 - अंतरदृस्टि या सूझ का सिद्धांत तथा गेस्टाइलट सिद्धांत  -  इस सिद्धांत के सम्बन्ध में महत्वपूर्ण तथ्य इस प्रकार है। 

  •  इस सिद्धांत में - वनमानुष और चिम्पांजी पर प्रयोग किया गया। 
  •  इस सिद्धांत के प्रवर्तक वर्दीमर ,कोफ्फा और कोल्हर थे। 
  •  यह सिद्धांत समस्याओं को सुलझाने के लिए स्वयं  को ही खोजने पर बल देता है। 

3 - सामाजिक अधिगम का सिद्धांत तथा प्रेक्षणात्मक अधिगम का सिद्धांत -  इस सिद्धांत के सम्बन्ध में महत्वपूर्ण तथ्य इस प्रकार है। 


  •  इस सिद्धांत का प्रतिपादन अलबर्ट बंदुरा ने किया था। 
  •  इस सिद्धांत के अनुसार व्यक्ति सामाजिक व्यवहारों का अनुकरण करता है।
  •  उदहारण के लिए - किसी अभिनेता को देखकर उसी की तरह व्यवहार करने का प्रयास करना। 

4 - अनुकूलित अनुक्रिया का सिद्धांतइस सिद्धांत के सम्बन्ध में महत्वपूर्ण तथ्य इस प्रकार है।


  •  इस सिद्धांत का प्रतिपादन " ईवानल पेट्रोविच पावलॉव " द्वारा किया गया था। 
  •  " ईवानल पेट्रोविच पावलॉव " का प्रतिपादन सन -1904 में किया था। 
  •  इस सिद्धांत के अन्य उपनाम इस प्रकार है - शास्त्रीय अनुबंध का सिद्धांत , सम्बन्ध प्रतिक्रिया का सिद्धांत , उद्दीपक प्रतिक्रिया का सिद्धांत 
  •  ईवानल पेट्रोविच पावलॉव " ने यह प्रयोग एक कुत्ते के ऊपर किया था। 

अधिगम की विधियाँ

अधिगम की विधियाँ
अधिगम की विधियाँ


अधिगम की विभिन्न विधियाँ है , जिनमे से कुछ महत्वपूर्ण अधिगम विधियाँ इस प्रकार है। 

1 करके सीखना विधि  - जब बालक किसी कार्य को प्रत्यक्ष रूप से करके सीखता है, तो उसे हम ' करके सीखना " विधि के अंतरगर्त मानते है। इस विधि में बालक किसी कार्य को  स्वयं करते है और यदि कोई त्रुटि होती है ,तो उसका सुधार करके पुनः करते है। 


इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

अमानक वर्ण

बाल विकास को प्रभावित करने वाले कारक pdf

sanskrit varnamala mock test