अमानक वर्ण

अमानक वर्ण   Hindi grammar questions  for competitive exam  part-5   1  शुद्ध वर्तनी    2 . अमानक वर्ण   (i)  - शुद्ध वर्तनी ➨ बर्तन की शुद्ध " वर्तनी " क्या है ?   बर्तन का शुद्ध वर्तनी ➨ "बर्तन " का शुद्ध वर्तनी   "बरतन " है ∣   (ii) . अमानक वर्ण - हिंदी में बहुत से ऐसे वर्ण हुआ करते थे ,जो की वर्तमान समय में चलन में नहीं है ,अथवा हिंदी के मूल वर्णो में शामिल नहीं है।  इस प्रकार के  सभी वर्ण " अमानक वर्णो " की श्रेणी में  आते हैं Ι  अर्थात वे   " वर्ण " जो पूर्व में तो मान्य रहे हो ,परन्तु वर्तमान वर्णमाला के दृस्टीकोण   से मान्य न  होते हो , अमानक वर्ण है ।     अमानक वर्ण क्या है ➨ ऐसे वर्ण जिनका कोई " मानक " न हो , तथा जो सर्वमान्य न हो " अमानक " वर्ण है , अथवा ऐसे वर्ण जिनका पहले तो मानक रहा हो परन्तु वर्तमान समय में उनका कोई " मानक " न  हो अमानक वर्ण कहलाते है ।   अमानक वर्ण किसे  कहते है ➨ जब कोई वर्ण वर्तमान परिपेक्ष्य  के मानकों  पर खरा नहीं उतरता अथवा

शिक्षा मनोविज्ञान

शिक्षा  मनोविज्ञान

(EDUCTION PSYCHOLOGY)

बाल विकास एवं शिक्षा शास्त्र 


शिक्षा  मनोविज्ञान - EDUCATION PSYCHOLOGY

शिक्षा  मनोविज्ञान - EDUCATION PSYCHOLOGY

नमस्कार दोस्तों , इस आर्टिकल में हमने "" शिक्षा मनोविज्ञान  (EDUCATION PSYCHOLOGY) " के प्रश्नों का एक - एक करके संकलन किया है। साथ ही इस पीडीऍफ़ में हमने " बाल विकास और शिक्षा शास्त्र " के सभी topics को विषयवार cover किया है। इस नोट्स की विशेषता यह है , कि - इसमें आपको पढ़ने , समझने और याद करने में आसानी होगी। कियोकि इन नोट्स को आपके बालविकास एवं  शिक्षा - शास्त्र को समझने और याद करने की समस्याओं को ध्यान में रखकर बनाया गया है।


बालविकास एवं  शिक्षा - शास्त्र

बालविकास एवं  शिक्षा - शास्त्र


(SHORT NOTES- TOPIC 2)


मनोविज्ञान शब्द की उत्पत्ति


(1 )  सायकोलॉजी  -  " सायकोलॉजी "  शब्द की उत्पत्ति  "ग्रीक भाषा " के दो शब्द - सायको  और लोगोस से हुई है I ग्रीक भाषा में  " साइकी " का  अर्थ -  आत्मा और लोगोस का अर्थ - " विज्ञान " है l इस प्रकार इस शब्द का पूर्ण अर्थ " आत्मा का विज्ञान " होता है ।   अर्थात " ग्रीक भाषा " में सायकोलॉजी को हम  आत्मा 
का  विज्ञान कहते है । 

मनोविज्ञान का अर्थ

(2 ) मनोविज्ञान - सायकोलॉजी शब्द को हिंदी भाषा में  " मनोविज्ञान " कहते है । मनोविज्ञान से तात्पर्य  " मन का विज्ञान " अथवा - " मानसिक क्रियाओं का  विज्ञान " से है I  अर्थात ' मनोविज्ञान एक ऐसा विज्ञान होता है , जो कि  हमारे  मन , मस्तिष्क से संचालित होता है ।  इस " मनोविज्ञान " शब्द के अर्थ में समय से साथ परिवर्तन देखने को मिला है l

सायकोलॉजी

जैसे कि -

(3  )  ई पू  से 16 वीं शाताब्दी तक के कार्यकाल तक - इसे  -  " आत्मा का विज्ञान " कहते थे । इसके पमुख समर्थक - " सुकरात , प्लेटो , अरस्तु , रैम  , हॉबस  आदि ने किया था ।
(4  )   16 वीं शाताब्दी से 17  वीं  शताब्दी  तक के कार्यकाल तक - इसे  -  " मन या मस्तिष्क  का विज्ञान " कहते थे । इसके पमुख समर्थक - " थॉमस , रीड , लॉक   आदि ने किया था ।

मनोविज्ञान

(5 )  17  वीं शाताब्दी से 19  वीं  शताब्दी  तक के कार्यकाल तक - इसे  -  " चेतना  का विज्ञान " कहते थे । इसके पमुख समर्थक - " विलियम जेम्स , टिचनर , जेम्सली -  आदि ने किया था ।
(6  )  19   वीं शाताब्दी से  " वर्तमान समय काल तक "   के कार्यकाल तक - इसे  -  " व्यवहार  का विज्ञान " कहते थे । इसके पमुख समर्थक -  एकमात्र  " वॉटसन "   ने किया था ।



मनोविज्ञान की प्रथम प्रयोगशाला


➤ पश्चिम के देशो में मनोविज्ञान की प्रथम प्रयोगशाला सर्वप्रथम - " विलियम वुंट " द्वारा स्थापित हुई थी ।

मनोविज्ञान की प्रथम प्रयोगशाला

मनोविज्ञान की प्रथम प्रयोगशाला


मनोविज्ञान के सिद्धांत


➤मनोवैज्ञानिक " विल्सन के अनुसार - " मन  मस्तिष्क के अंदर जो " लिम्पिक सिस्टम " होता है , उसमे मौजूद होता है "

➤ भारत में  लगभग - 20 ( बीसवीं शताब्दी)  में - " पाश्चत्य मनोविज्ञान " का अध्ययन प्रारम्भ हुआ ।

➤ वही हमारे प्राचीन भारतीय दर्शन में  मनोविज्ञान में ज्ञानिद्रिओं और अंतःकरण के अध्ययन पर बल दिया गया है ।  जिसमे कि  अंतःकरण के अंतरगर्त  - मन , बुद्धि , अहंकार , चित्त और आत्मा ) आदि के अध्ययन को बल दिया जाता है I इसके अंतरगर्त  " चार कोषों "में व्यवहार को समझाया गया है । अर्थात इन चार कोषों से ही किसी इंसान के व्यवहार हो अच्छी तरह समझने में बल दिया गया है ।

वे चार कोष इस प्रकार है -

➤ अन्नमय कोष - अन्मय कोष के अंतरगर्त  हमारे शरीर की " ज्ञानइन्द्रियों " और  " कर्म इन्द्रियों " का अध्ययन किया जाता है ।

प्राणमय कोष -  भारतीय दर्शन में " प्राणमय कोष " के अंतरगर्त - " शारीरिक क्षमता " और  " प्राण शक्ति " कितनी है इसका अध्ययन मुख्य रूप से किया जाता है ।


(iii  ) मनुमय कोष - भारतीय दर्शन के अंतरगर्त - " मनुमय कोष " के अंतरगर्त  बालक के " मन " का अध्ययन किया जाता है ।

(iv  ) विज्ञानमय कोष - भारतीय दर्शन के मतानुसार  -  " विज्ञान - मय " कोष के अंतरगर्त - बालक की " बुद्धि " को शामिल किया जाता है ।

शिक्षा मनोविज्ञान नोट्स




नोट- मनोविज्ञान दर्शन शास्त्र की एक शाखा है - जिससे सर्वप्रथम - " विलियम जेम्स " द्वारा अलग किया गया था ।

➤भारतीय मनोविज्ञान के अनुसार -  मनोविज्ञान वह विज्ञान है , जो कि  " बाह्य इन्द्रयों " से प्राप्त हुए अनुभव जो कि  हमारे मस्तिष्क में होते है ,  को सुरक्षित रखता है । दूसरे शबदो में कहे तो ऐसा अनुभव जो  हमारे  मन - बुद्धि - अहम् - आत्मा  आदि  में सुरक्षित हो - मनोविज्ञान है I  भारत के मनोविज्ञानिकों अथवा विचारको ने  - मन - को  " छट्टी इन्द्रिय " कहा है ।

मनोवैज्ञानिक - फेचनर के अनुसार - " मनोविज्ञान का अध्ययन - मनोशारीरिक विधियों का विकास है ।

➤ मनोविज्ञानिक  फाईड और चुग के अनुसार - " मनोविज्ञान के दो स्तर है - जिसमे कि 
प्रथम स्तर है -  चेतन जबकि दूसरा स्तर है ---  अचेतन -  इसलिए - फ्राइड और चुग को - चेतन और अचेतन विज्ञान का जनक भी  कहा  जाता है ।"

दोस्तों , SHORT - NOTES के इस आर्टिकल में  बाल - विकास एवं शिक्षा शास्त्र के इस टॉपिक जिसका नाम "वंशानुक्रम और वातावरण" है,को  हमने बहुत ही SHORT में समझा है। अतः यदि आप बाल - विकास एवं शिक्षा शास्त्र के SHORT - NOTES  का अगला आर्टिकल  देखना चाहते है ,तो नीचे दी गयी लिंक पर CLICK करें।



यदि आप " बाल - विकास एवं शिक्षा शास्त्र " के विस्तृत नोट्स चाहते है , तो नीचे दी गयी लिंक पर क्लिक करे। जिसमे " बाल - विकास एवं शिक्षा शास्त्र" सभी टॉपिक को कवर किया गया है। साथ ही इस नोट्स की विशेषता यह है , कि इसमें आपको समझने में और याद करने में किसी भी तरह की समस्या का सामना नहीं करना पड़ेगा। इन नोट्स को बनाया ही इस तरह गया है , कि ये तुरंत समझ में आये और याद हो जाए। 

बाल - विकास एवं शिक्षा शास्त्र
बाल - विकास एवं शिक्षा शास्त्र





studysupport.in
studysupport.in








इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

अमानक वर्ण

sanskrit varnamala mock test

विकास की अवस्थाएं