अमानक वर्ण

अमानक वर्ण  Hindi grammar questions for competitive exam part-5




1  शुद्ध वर्तनी    2 . अमानक वर्ण 

 (i)  -शुद्ध वर्तनी ➨ बर्तन की शुद्ध " वर्तनी " क्या है ?
बर्तन का शुद्ध वर्तनी ➨ "बर्तन " का शुद्ध वर्तनी   "बरतन "है ∣

  (ii) . अमानक वर्ण - हिंदी में बहुत से ऐसे वर्ण हुआ करते थे ,जो की वर्तमान समय में चलन में नहीं है ,अथवा हिंदी के मूल वर्णो में शामिल नहीं है।  इस प्रकार के  सभी वर्ण " अमानक वर्णो " की श्रेणी में  आते हैं Ι
 अर्थात वे   " वर्ण " जो पूर्व में तो मान्य रहे हो ,परन्तु वर्तमान वर्णमाला के दृस्टीकोण   से मान्य न  होते हो , अमानक वर्ण है ।
अमानक वर्ण क्या है ➨ ऐसे वर्ण जिनका कोई " मानक " न हो , तथा जो सर्वमान्य न हो " अमानक " वर्ण है , अथवा ऐसे वर्ण जिनका पहले तो मानक रहा हो परन्तु वर्तमान समय में उनका कोई " मानक " न  हो अमानक वर्ण कहलाते है ।

अमानक वर्ण किसे  कहते है ➨ जब कोई वर्ण वर्तमान परिपेक्ष्य  के मानकों  पर खरा नहीं उतरता अथवा वर्तमान में स्वीकार वर्णमाला में शामिल न  हो , अथवा पूर्व में स्वी…

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PART-11


(i) फ्राइड के अनुसार -     " किसी बालक में समाजीकरण की प्रक्रिया के लिए सर्वोत्तम आयु - 5 वर्ष की होती है।

"(ii ) बोगार्डस के अनुसार - " समाजीकरण वह प्रक्रिया है , जिसके द्वारा बालक समाज के कल्याण के लिए एक -दूसरे पर निर्भर रहकर व्यवहार करना सीखता है।, और जिसके द्वारा सामाजिक आत्म - नियंत्रण , सामाजिक - उत्तरदायित्व  एवं  संतुलित व्यक्तित्व के अनुभव को  प्राप्त करते है।  "


बालक की समाजीकरण  प्रक्रिया 


→ समाजीकरण प्रक्रिया बालक के जीवन में प्रारंभ से ही शुरू हो जाती है। 
→ बालक की सामाजिक - संस्कृति  का विकास भी इसी प्रक्रिया द्वारा होता है। 
→ समाजीकरण प्रक्रिया के द्वारा ही बालक - सुसभ्य , और सामाजिक मान्यताओं के अनुसार स्वयं  को बनता है। 
→ इस प्रक्रिया के द्वारा ही बालक परम्पराओं एवं मान्यताओं का पालन करना सीखता है। 
→ इस प्रक्रिया के द्वारा ही सस्कृति और सम्भ्यताओ को पीढ़ी - दर - पीढ़ी हस्तांतरित किया जाता है। 
अतः उपरोक्त आधार पर हम कह सकते है , कि की भी व्यक्ति के जीवन में सामाजिक करण की प्रक्रिया एक महत्वपूर्ण स्थान रखती है , कियोकि बिना सामाजिक-करण प्रक्रिया से गुजरे बिना किसी भी बालक का सामाजिक विकास होना संभव नहीं है। 
समाजीकरण के कारक 
  बालक की समाजीकरण की प्रक्रिया के तहत विभिन्न कारक जिम्मेदार होते है , जो कि इस प्रकार है। 
(i) बालक से सहानुभूति रखना चाहिए , जिससे कि वह बालक आगे स्वयं  भी  दूसरो के प्रति अपनी सहानुभूति रखे। 

(ii) बालक को निर्देश मिलना । 
(iii) बालक को उसके अच्छे कामो के लिए उसे पुरुस्कृत करना। 

(iv) बालक के गलत कामो के लिए उससे दंड देना। 
(v) बालक द्वारा " अनुकरण की प्रक्रिया " करना। 

(vi ) बालक का पालन - पोषण ठीक तरह नहीं किया जाए तो इसका असर भी उसके सामजिक जीवन पड़ता है। 
(vii ) बालक के विद्यालय जाना और अध्यापक के वार्तालाप से उसके सामजिक स्तर में एक सकारत्मक बदलाव देखने को मिलता है। 
(viii ) खेलों द्वारा भी बालक के समाजीकरण प्रक्रिया का विकास होता है। 


समाजीकरण के imp questions for tet 
प्रश्न 1 - बालक के  "सामाजिक - व्यक्तित्व " का विकास करने वाली प्रक्रिया क्या कहलाती है ?
उत्तर - बालक के  "सामाजिक - व्यक्तित्व " का विकास करने वाली प्रक्रिया - " समाजीकरण " कहलाती है। 
प्रश्न 2 -बालक के " समाजीकरण की प्रक्रिया " का विकास - किन अवस्थाओं में होता है ?
उत्तर - बालक की सामाजीकरण की प्रक्रिया का विकास निम्न तीन अवस्थाओं में होता है। 
(i ) पूर्व बाल्यावस्था  
(ii ) बाल्यावस्था 
(iii) किशोरावस्था 
प्रश्न 3 -  किसी बालक की "समाजीकरण प्रक्रिया " के तहत धर्म का क्या महत्व होता है ? अथवा धर्म किस प्रकार से व्यक्ति के जीवन में समाजीकरण की प्रक्रिया को बल देता है ?



उत्तर - किसी बालक के समाजीकरण प्रक्रिया के तहत धर्म का निम्न महत्व होता है। 
(i ) बालक को आदर्शवादी बनाने के लिए। जिससे वह एक आदर्शवादी समाज की स्थापना कर सके। 
(ii ) बालक को अनुकरण करना सीखाने में , जिससे बालक अच्छी बातो का अनुकरण करना सीख सके। 
(iii ) बालक को अच्छे संस्कार देने के लिए , जिससे वह एक सभ्य इंसान बन सके। 
अतः  इस प्रकार की विभिन्न बातो का योगदान में धर्म एक महत्वपूर्ण भूमिका अदा करता है।धर्म का काम केवल पूजा - पाठ तक ही सीमित नहीं होता है , बल्कि इससे कही अधिक - एक अच्छे आदर्शवादी समाज की स्थापना करना भी होता है। 
प्रश्न 4 - किसी कक्षा में शिक्षक  को  बालको के समाजीकरण की प्रक्रिया को चलाने के लिए क्या कदम उठाने चाहिए ?

उत्तर -   किसी कक्षा में शिक्षक बालको के समाजीकरण की प्रक्रिया को सुचारु रूप से चलाने के लिए  अथवा 
समाजीकरण की प्रक्रिया को और भी अधिक तेज़ करने के लिए निम्न कदम उठाये जाने चाइये। 
(i) शिक्षक को चाहिए कि वो कक्षा में समाजीकरण प्रक्रिया के लिए सर्वप्रथम - विद्यालय की परम्पराओ से परिचित करवाए। 
(ii) एक शिक्षक को चाहिए कि - वो बालको में - "सामाजिक - आदर्श " की भावनाओ को स्थापित करे। 
(iii) शिक्षक का यह दायित्व है कि - वो कक्षा में बालको को समाज के प्रति जो आयशयक जानकारियां है , वो प्रदान करे। 
प्रश्न 5 - खेलो द्वारा बालक का समाजीकरण किस प्रकार से किया जा सकता है ?
उत्तर - खेलो द्वारा बालक के समाजीकरण प्रक्रिया पर गहरा प्रभाव पड़ता है , और बालको के समाजीकरण प्रक्रिया को और  भी अधिक बल मिलता है। खेलों के द्वारा बालक की समाजीकरण की प्रक्रिया के तेज़ होने निम्न कारण है। 
(i) खेलो के द्वारा बालक में "सुरक्षा  की भावना " का जन्म होता होता है। 
(ii) खेलो द्वारा ही बालक साथ मिलकर काम करना सीखता है , साथ ही साथ उसमे नेतृत्व की भावना का विकास भी खेलो के द्वारा ही होता है। 
(iii) इसके साथ ही खेलो द्वारा बालको में " अनुसरण " करने की प्रवत्ति का विकास होता है , जो कि जीवन के लिए अति आवश्यक होता है। 
प्रश्न 6 -  बालक के लिए समाजीकरण प्रक्रिया का प्रथम स्त्रोत क्या अथवा कौन होता  है ?
उत्तर - बालक के लिए समाजीकरण प्रक्रिया का प्रथम स्त्रोत - " बालक का परिवार होता है। "

प्रश्न 7 - बालक के सामाजिकरण प्रक्रिया को प्रभावित करने वाले प्रमुख कारक अथवा घटक कौन - कौन से होते है।?
उत्तर - बालक के सामाजिकरण प्रक्रिया को प्रभावित करने वाले प्रमुख कारक अथवा घटक निम्नलिखित है। 
(i ) बालक के शरीर की बनावट कैसी है ,और बालक ला स्वास्थ्य कैसा रहता है।  ये भी सामाजिक दृस्टि से महवपूर्ण होता है , कियोकि यदि किसी बालक का स्वस्थ्य अच्छा नहीं रहता है , तो उसकी समाजीकरण की प्रक्रिया में धीमी होती है। 
(ii ) बालक का परिवार कैसा है। अर्थात क्या बालक का परिवार सामाजिक है अथवा नहीं ? कियोकि यदि बालक का परिवार सामाजिक होगा तो उसका असर उस बालक पर भी पड़ेगा , वही दूसरी और यदि बालक का परिवार सामाजिक नहीं है अथवा कम है तो बालक में भी समाज के प्रति अरुचि रहेगी। 
(iii ) बालक का आर्थिक स्तर क्या है ,? यह भी बालक की समाजीकरण  प्रक्रिया को पूर्ण रूप से प्रभावित करता है। 

प्रश्न 8 - बालक के जीवन में  प्रतिद्वंदात्मक  समाजीकरण की  अवस्था किसे कहा जाता है ?





उत्तर - बालक के जीवन में  प्रतिद्वंदात्मक  समाजीकरण की  अवस्था - बालक की " बाल्यावस्था " को कहा जाता है। 





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