अमानक वर्ण

अमानक वर्ण   Hindi grammar questions  for competitive exam  part-5   1  शुद्ध वर्तनी    2 . अमानक वर्ण   (i)  - शुद्ध वर्तनी ➨ बर्तन की शुद्ध " वर्तनी " क्या है ?   बर्तन का शुद्ध वर्तनी ➨ "बर्तन " का शुद्ध वर्तनी   "बरतन " है ∣   (ii) . अमानक वर्ण - हिंदी में बहुत से ऐसे वर्ण हुआ करते थे ,जो की वर्तमान समय में चलन में नहीं है ,अथवा हिंदी के मूल वर्णो में शामिल नहीं है।  इस प्रकार के  सभी वर्ण " अमानक वर्णो " की श्रेणी में  आते हैं Ι  अर्थात वे   " वर्ण " जो पूर्व में तो मान्य रहे हो ,परन्तु वर्तमान वर्णमाला के दृस्टीकोण   से मान्य न  होते हो , अमानक वर्ण है ।     अमानक वर्ण क्या है ➨ ऐसे वर्ण जिनका कोई " मानक " न हो , तथा जो सर्वमान्य न हो " अमानक " वर्ण है , अथवा ऐसे वर्ण जिनका पहले तो मानक रहा हो परन्तु वर्तमान समय में उनका कोई " मानक " न  हो अमानक वर्ण कहलाते है ।   अमानक वर्ण किसे  कहते है ➨ जब कोई वर्ण वर्तमान परिपेक्ष्य  के मानकों  पर खरा नहीं उतरता अथवा

पारिस्थितिकी एवं पर्यावरण

part-14

नमस्कार दोस्तों , ये - " ecology and environment " विषय का पहला  आर्टिकल (Article) है। इसमें    भी  पारिस्थितिकी एवं पर्यावरण   से सम्बंधित most important questions and Answer को सम्मलित किया  गया है। जिसके अंतरगर्त विभिन्न  पर्यावरणीय विषय ( Environmental Issues) जैसे कि -Climate Change ,Environmental Protection,Environmental Education,Environment Essay  आदि को एकसाथ शामिल किया गया है। जो कि आपके  "competitive Exams "  जैसे कि - CTET/MPTET/UPTET/RTET/PSC/UPSC/MPSC/SSC/RAIWAY/STATE EXAMS  के लिए अत्यंत उपयोगी साबित  होगा। 




प्रश्न -1 - पर्यावरण का अर्थ एवं इसके लक्षण बतातिये ?
अथवा
पर्यावरण कितने प्रकार का होता है , समझाईये ?
उत्तर -1 - पर्यावरण शब्द अंग्रेजी शब्द के " ENVIRONMENT" शब्द से बना है । सरल शब्दो में  जिसका अर्थ होता है कि पर्यावरण के अंतरगर्त वे सभी वस्तुए आती है जो किसी स्थान को प्रत्यक्ष रूप से घेरे हुए है ।
जैसा कि हम जानते है कि मनुष्य पूर्ण रूप से अपने चारों और के पर्यावरण से प्रभावित होता है , साथ ही वह स्वयं के द्वारा अपने पर्यावरण को भी प्रभावित करता है ।
हमारे पर्यावरण की रचना मुख्यतः वायु ,जल ,मृदा , पादप ,प्राणी  आदि का विशेष महतव है । कियोकि इनके बिना हम अपने पर्यावरण की कल्पना भी नहीं किआर सकते है ।
डॉ डेरिस  अनुसार   - " मानव  के सम्बन्ध में भौगोलिक वातावरण से आशय  धरती  या मनुष्य के चारो ओर फैले हुए उन सभी भौतिक स्वरूपों से है , जिन स्वरूपों में वह  रहता है , जिनका उसकी आदतों और क्रियाओं पर प्रभाव पड़ता है ।"
सोरोकिन के अनुसार -  " भौगलिक पर्यावरण से आशय ऐसी अवस्थाओं से है , जो की मनुष्य के कार्यों से पूर्णतः स्वतंत्र या अलग है, दूसरे शब्दों में जो कि मनुष्य द्वारा बना  नहीं  है  तथा जो स्वतः ही परिवर्तित होता  है ।"

(ii )  पर्यावरण  निम्नलिखित 2  प्रकार का होता है ।
(1 ) प्राकृतिक  पर्यावरण  (2)  जैविक  पर्यावरण

https://www.studysupport.in/2019/02/ecology-and-environment-objective-questions-and-answers-mcq-on-ecology-and-enviroment-enviroment-quiz-2018-enviroment-mcq-environment-questions-for-ctet-uptet-mptet-net-railway-paryavaran-paryavaran-evam-paristhitiki-ecology-and-environment-in-hindi-.html
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(1 ) प्राकृतिक  पर्यावरण - भौतिक पर्यावरण से आशय ऐसे पर्यावरण से होता है , जिसमे  उन सभी तत्वों को शामिल किया जाता है , जिनका प्रत्यक्ष प्रभाव मनुष्य पर पड़ता है । जैसे कि - सूर्य , पृथवी, वायु , जल ,अग्नि  तथा इनसे जुडी वे समस्त क्रियाये जिनका प्रभाव मानव पर प्रत्यक्ष एवं अपत्यक्ष रूप में पड़ता है ।
जिनमे - सूर्य की तपन शक्ति , पृथ्वी की गतियां , गुरुत्वाकर्षण , ज्वालामुखी , आदि विभिन्न प्रकार की क्रियाओं को इसके अंतरगर्त सम्मिलित किया जाता है I

(ii) जैविक पर्यावरण -   जैविक पर्यावरण एक ऐसा पर्यावरण होता है , जो की मनुष्य के आसपास का वातावरण  होता है I  जीव - जंतु , वनस्पति तथा मनुष्य को शामिल किया जाता है । प्रकृति में जिस वातावरण में  मानव एवं  अन्य -जीव - जंतुओं  एक अतरसबंध या समंजस्यता के साथ रहते है , वे सभी " जैविक पर्यावरण " के अंतरगर्त आते है ।

प्रश्न -2 - पर्यावरण हेतु समाज में जनचेतना को जाग्रत करने हेतु क्या कदम उठाये जाने चाहिए  अपने सुझाव दीजिये ?
 उत्तर -2- पर्यावरण के सबंध में यदि हम अपने समाज में जनचेतना जाग्रत करना चाहते है , तो हमे पर्यावरण और उससे सम्बंधित भिन्न पहलुओं पर गौर करना अति आवश्यक होगा । कियोकि जब तक हम  विषयों पर ध्यान केंद्रित नहीं करते जो की हमारे पर्यावरण को नुक्सान पहुंचाते है , अथवा हमारे पर्यावरण के लिए घातक के तब तक हम उसकी संपूर्ण चुनौतियों को नहीं समझ पाएंगे ।
जैसा की हम जानते है आज विश्व में  पर्यावरण से जुडी हुई समस्याऐं एक विकराल रूप ले चुकी है । जिसके कारण बहुत है , परन्तु आज हम उन सभी कारणों की चर्चा करेंगे और सुझाव देंगे जो की अति आवश्यक  है ।
(i ) जनसंख्या वृद्धि   -आज विश्व में  जनसंख्या वृद्धि एक बहुत ही बड़ी समस्या बन चुकी है ।  इससे  जहाँ एक तरफ प्रति व्यक्ति हेतु संसाधनों की उपलब्धता  कम  हो रही है , वही दूसरी तरफ प्रकृति पर प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष प्रभाव पड़ता जा रहा है । आज जनसँख्या वृद्धि होना एक प्राकर्तिक समस्या ही नहीं बल्कि - आर्थिक समस्या , सामजिक समस्या भी बन चुका है ।
यदि बात भारतीय परिपेक्ष्य में की जाए तो यह समस्या और भी विकराल है । कियोकि भारत विश्व की दूसरी सबसे बड़ी जनसंख्या वाला देश है । जनगणना सेंसेक्स 2011 के अनुसार भारत की कुल जनसँख्या लगभग 121 करोड़ है ।
जनसंख्या वृद्धि एक बहुत बड़ी समस्या है , जिससे देश में गरीबी , बेरोजगारी और भुखमरी की समस्या एक विकराल रूप ले चुकी है ।
(ii ) प्राकृतिक संसाधनों की उपलब्धता कम  होना  - जैसा की हम जानते है , की हमारी पृथ्वी पर मौजूद प्राकर्तिक संसांधनों की उपलब्धता सीमित या या कम है । यदि हम इन संसाधनों का उपयोग उनकी उपलब्ध मात्रा के अनुसार न करके अपनी स्वार्थी आवश्यकताओं के अनुसार करते है , तो जल्द ही ये संसाधन समाप्त हो जायगे, जिस ओर हम पहले ही बहुत आगे बढ़  चुके है ।
 लगातार  दिन व दिन प्रकृति का दोहन कर रहे है , कियोकि हम उसके त्वरित लाभ से प्रेरित है , न की उसके दूरगामी परिणामो से । यही सिलसिला चलता रहा तो वह दिन दूर नहीं जब संपूर्ण मानव सभ्यता का अस्तित्व ही खतरे में पड जाएगा ।
(2) पर्यावरण हेतु समाज में जनचेतना को जाग्रत करने हेतु  निम्नलिखित कदम  उठाये जाने चाहिए ।
  - हमे पर्यावरण में जनचेतना जाग्रत करने के लिए विभिन्न प्रकार के दृश्य एवं श्रव्य साधनो का प्रयोग किया जाना चाहिए ।
 जैसे की - टीवी , रेडियो , वीडियो , ऑडियो , इंटरनेट , सोशल नेटवर्किंग वेबसाइट और एप्लीकेशन , यूट्यूब , स्लाइडिंग शो द्वारा , रंगमंच कार्यक्रम , सम्मेलन , आदि विभिन्न प्रकार से किया जा सकता है ।
इसके अंतरगर्त और भिन्न - भिन्न प्रकार के साधनो का प्रयोग हम कर सकते है , आवशयक यह है कि - हमारे प्रयास कितने प्रभावी है ।
साथ ही जिस समाज विशेष में हम इन साधनों का प्रयोग कर रहे है , क्या वह उस समाज हेतु प्रभावी होते है अथवा नहीं,यह अत्यन्त महवपूर्ण है ।

लेखक की कलम से ✎ -   जनसंख्या वृद्धि विश्व और भारत  के लिए एक बहुत बड़ी समस्या बन चुका  है ,जो कि  दिन व दिन एक विकराल रूप लेती जा रही है । जिससे हम विभिन्न प्रकार की आर्थिक , सामाजिक , पर्यावरणीय समस्याओं को न्योता दे रहे है । यदि बात भारतीय परिपेक्ष्य में की जाए तो यह समस्या ओर  भी भयानक रूप ले चुकी है । अब अगर हम " one child policy " पर भी काम करे तो भी बात बहुत आगे निकल चुकी है । दूसरे शब्दों में कहु तो ये एक ऐसी हाई- स्पीड गाडी है , जिसका अब ब्रेक भी लगा दिया जाए तो ये गाडी कितने दशक बाद रुकेगी कोई नहीं बता सकता ।
परन्तु ये बात सोचनीय है कि इस समस्या पर अभी तक हमारे देश  में कोई भी ठोस कदम क्यों नहीं उठाया गया । हो सकता है कि इसके पीछे कई कारण हो , जिनमे राजनितिक कारण भी हो । किंतु  एक भारतीय नागरिक होने के नाते मेरा ये दायित्व है , कि इस कि इसके लिए हमारे समाज को जागरूक करू । कियोकि हममे से अधिकतर लोगो को यह आदत लग चुकी है , की सभी बुरी चीजों का ठीकरा सरकार पर फोड़ दो ।
क्या हमारा समाज के लिए कोई दायित्व नहीं है , क्या हर बीमारी की दवा कानून पारित होना अथवा सुप्रीम कोर्ट जाना ही है । मेरे विचार से नहीं । समाज अगर तय कर ले कि एक से अधिक बच्चे होने पर उस परिवार का सामाजिक बहिस्कार  कर दिया जाए , तो  शायद हमे कभी भी किसी कानून की जरुरत ही न पड़े ।

 , ये - " ecology and environment " विषय का पहला  आर्टिकल (Articleहै। इसमें    भी  पारिस्थितिकी एवं पर्यावरण   से सम्बंधित most important questions and Answer को सम्मलित किया  गया है। जिसके अंतरगर्त विभिन्न  पर्यावरणीय विषय ( Environmental Issues) जैसे कि -Climate Change ,Environmental Protection,Environmental Education,Environment Essay  आदि को एकसाथ शामिल किया गया है। जो कि आपके  "competitive Exams "  जैसे कि - CTET/MPTET/UPTET/RTET/PSC/UPSC/MPSC/SSC/RAIWAY/STATE EXAMS  के लिए अत्यंत उपयोगी साबित  होगा। यदि आपको ये आर्टिकल अच्छा लगा तो इसके आगे के भागो के लिए नीचे दी गयी लिंक्स पर क्लिक करें। धन्यवाद 


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